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डिजिटल थरà¥à¤®à¥‹à¤®à¥€à¤Ÿà¤° और बीमार शिशà¥à¤¶à¤¿à¤¶à¥à¤“ं में बà¥à¤–ार के बारे में ये विचितà¥à¤° बातें जानें!
विषाणà¥à¤œà¤¨à¤¿à¤¤ संकà¥à¤°à¤®à¤£ (वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨) विषाणà¥à¤“ं (वायरस) की वजह से होते हैं। ये जीवाणà¥à¤œà¤¨à¤¿à¤¤ संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ (बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इनफेकà¥à¤¶à¤¨) से अलग होते हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इनफेकà¥à¤¶à¤¨ की वजह जीवाणॠ(बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾) होते हैं।
बहà¥à¤¤ से अलग-अलग तरह के वायरस होते हैं, जो हलà¥à¤•े से लेकर गंà¤à¥€à¤° और यहां तक कि जानलेवा संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ का कारण बनते हैं।
सबसे आम वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨ है फà¥à¤²à¥‚ या इनà¥à¤«à¥à¤²à¥à¤à¤‚जा। मगर, और à¤à¥€ कई वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨ होते हैं। इनके बारे में आगे और अधिक जानें।
वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨ कà¥à¤¯à¤¾ है?
वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨ वायरस की वजह से होता है, जो कि बहà¥à¤¤ छोटे कीटाणॠहोते हैं। हजारों अलग-अलग तरह के वायरस हैं जो विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ तरह की संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• बीमारियां और सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ पैदा करते हैं।
वायरस आपके शरीर में सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ कोशिकाओं पर हमला करते हैं। ये सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ और जीवित मेजबान कोशिकाओं (होसà¥à¤Ÿ सेल) को à¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ करने के लिठइसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करते हैं और बढ़ते जाते हैं। इसकी वजह से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ होसà¥à¤Ÿ कोशिका अपना सामानà¥à¤¯ कारà¥à¤¯ नहीं कर पाती। कà¥à¤› वायरस होसà¥à¤Ÿ कोशिका को मार देते हैं, वहीं कà¥à¤› इसकी कारà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को बदल देते हैं। इसके बाद वायरस दूसरी कोशिकाओं की तरफ जाते हैं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ इसी तरह संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ या नषà¥à¤Ÿ कर देते हैं। इसकी वजह से ही आप बीमार होते हैं।
सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ अधिकांश वायरल संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ से लड़ सकती है, मगर कà¥à¤› विषाणॠगंà¤à¥€à¤° समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ पैदा करते हैं। वायरस विशिषà¥à¤Ÿ अंगों या शरीर के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ तंतà¥à¤°à¥‹à¤‚ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करते हैं। कà¥à¤› सबसे आम वायरल संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ में शामिल हैं:
वायरस किस तरह फैलता है?
वायरस बहà¥à¤¤ से तरीकों से फैलता है, यह इस बात पर निरà¥à¤à¤° करता है कि वायरस किस तरह का है। ये निमà¥à¤¨à¤¾à¤‚कित तरीकों से फैल सकते हैं:
संपरà¥à¤• या छूने से
निगलने से
संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ बूंदों को सांस के जरिये अंदर लेने से
शरीर के तरल के जरिये और यौन संचारित संकà¥à¤°à¤®à¤£
दूषित खून चढ़ाने से
दूषित सतहों, à¤à¥‹à¤œà¤¨ और पानी से
खून चूसने वाले वेकà¥à¤Ÿà¤° जैसे कि मचà¥à¤›à¤°, किलनी और पिसà¥à¤¸à¥‚
पशà¥à¤œà¤¨à¥à¤¯ बीमारियों से - जहां सामानà¥à¤¯à¤¤: पशà¥à¤“ं में होने वाली बीमा​री मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ में पहà¥à¤‚च जाà¤à¤‚
मà¥à¤à¥‡ कैसे पता चलेगा कि मेरे बचà¥à¤šà¥‡ को वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨ है?
चूंकि बहà¥à¤¤ से अलग-अलग तरह के वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨ हैं, इसलिठइसके लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ शायद इस बात पर निरà¥à¤à¤° करेंगे कि शिशॠकौन से वायरस से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ हà¥à¤† है। आमतौर पर वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨ के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ संकेत निमà¥à¤¨à¤¾à¤‚कित हैं:
बà¥à¤–ार
कंपकंपी
खांसी
गले में खराश
सरà¥à¤¦à¥€
नाक बहना या बंद होना
सिरदरà¥à¤¦
थकान
उलà¥à¤Ÿà¥€
à¤à¥‚ख कम लगना
दसà¥à¤¤ (डायरिया)
पेट दरà¥à¤¦
चकतà¥à¤¤à¥‡
सामानà¥à¤¯ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चिड़चिड़ा होना
अचà¥à¤›à¥‡ से न सो पाना
जनà¥à¤® के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ सालों में जब शिशॠकी रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ विकसित हो रही होती है, तो उस दौरान अकà¥à¤¸à¤° कई बार सरà¥à¤¦à¥€-जà¥à¤•ाम, चकतà¥à¤¤à¥‡ और पेट में गडबड़ी होती है।
यह पहचान पाना à¤à¥€ मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकता है कि कौन सी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ गंà¤à¥€à¤° है और कौन सी नहीं, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि शिशॠखà¥à¤¦ यह नहीं बता सकता कि उसे कैसा महसूस हो रहा है।
इसलिठजब à¤à¥€ आपको ये लकà¥à¤·à¤£ दिखाई दें तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह लें, ताकि किसी अनà¥à¤¯ इनफेकà¥à¤¶à¤¨ या बीमारी का पता चल सके।
हमेशा अपने मन की बात पर यकीन करें। यदि आपको लगे कि शिशॠकी तबियत ठीक नहीं है, तो शायद आप सही हैं, फिर चाहे शिशॠकी उमà¥à¤° कà¥à¤› à¤à¥€ हो। यदि आपके शिशॠको कोई और लकà¥à¤·à¤£ हो, जिसे लेकर आप चिंतित हों तो बेहतर है कि डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात की जाà¤à¥¤
वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨ का उपचार कैसे किया जाता है?
बहà¥à¤¤ से वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨ अपने आप ठीक हो जाते हैं, इसलिठउपचार की जरà¥à¤°à¤¤ नहीं होती।
वायरल संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ में à¤à¤‚टिबायोटिकà¥à¤¸ काम नहीं करतीं। दवाà¤à¤‚ केवल बà¥à¤–ार, बदन दरà¥à¤¦, सरà¥à¤¦à¥€ या खांसी जैसे लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ से राहत के लिठदी जाती है और इस दौरान आपके शिशॠका इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® वायरस से लड़ता रहता है। लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ का उपचार करने से शिशॠको बेहतर महसूस होगा।
वायरस का असर तीन दिन से à¤à¤• हफà¥à¤¤à¥‡ तक रहता है, इसके बाद शिशॠको अपने आप बेहतर महसूस होने लगेगा। इस दौरान आप उसे परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ तरल पदारà¥à¤¥ दें और आराम करने दें।
अधिकांश मामलों में à¤à¤‚टिवायरल दवाà¤à¤‚ नहीं दी जाती हैं। जो बचà¥à¤šà¥‡ असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ होते हैं, केवल उनका उपचार à¤à¤‚टिवायरल से किया जाता है। à¤à¤¸à¤¾ आमतौर पर इसलिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनके साथ कोई सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ जैसे ​हृदय रोग आदि है या फिर उनका जनà¥à¤® समय से पहले हà¥à¤† था या फिर कोई असाधà¥à¤¯ रोग है।
हालांकि, यदि बचà¥à¤šà¥‡ को वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨ की वजह से सैकंडरी या बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इनफेकà¥à¤¶à¤¨ हो जाठतो उसे à¤à¤‚टिबायोटिक दवाà¤à¤‚ देना जरà¥à¤°à¥€ हो सकता है।
बचà¥à¤šà¥‡ को à¤à¤‚टिबायोटिक दवा देने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° के निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥‹à¤‚ का पूरी तरह पालन करें और कोई à¤à¥€ खà¥à¤°à¤¾à¤• न चूकें। यदि आप ये दवा देना जलà¥à¤¦à¥€ बंद कर देंगे, तो बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ दोबारा जलà¥à¤¦ ही अधिक गंà¤à¥€à¤° रूप से हमला कर सकता है।
कà¥à¤› मामलों में यदि शिशॠको गंà¤à¥€à¤° इनफेकà¥à¤¶à¤¨ हो जाà¤, चाहे वायरल या बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤², तो उसे उपचार के लिठअसà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ करवाना पड़ सकता है।
शिशà¥à¤“ं में वायरल संकà¥à¤°à¤®à¤£ कब गंà¤à¥€à¤° होता है?
वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨ आमतौर पर गंà¤à¥€à¤° नहीं होता है और इसे ठीक होने में तीन से सात दिन का समय लग सकता है। यदि आपको खतरे के निमà¥à¤¨à¤¾à¤‚कित संकेत दिखाई दें तो तà¥à¤°à¤‚त शिशॠको डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास ले जाà¤à¤‚, जैसे कि:
लगातार खांसी जो à¤à¤• सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के बाद à¤à¥€ ठीक होती न लगे
डायरिया जो कि दवा लेने के बाद à¤à¥€ जारी रहे
मल में खून
बà¥à¤–ार, जो à¤à¤• हफà¥à¤¤à¥‡ या इससे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जारी रहे
दौरे पड़ना
कà¥à¤› à¤à¥€ खाने-पीने से इंकार करना
लगातार उलà¥à¤Ÿà¥€ होना
सांस लेने में तकलीफ
असामानà¥à¤¯ तौर पर उनींदापन या सà¥à¤¸à¥à¤¤à¥€
तà¥à¤µà¤šà¤¾, होंठो और नाखूनों की रंगत उड़ जाना या उनमें नीलापन लगना
निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण (डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨) के संकेत जैसे पेशाब कम आना, शà¥à¤·à¥à¤• शà¥à¤²à¥‡à¤® à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, धंसे हà¥à¤ कलांतराल (फॉनà¥à¤Ÿà¤¾à¤¨à¥‡à¤²) और शà¥à¤·à¥à¤• तà¥à¤µà¤šà¤¾ आदि।
वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨ होने पर शिशॠकी तबियत में सà¥à¤§à¤¾à¤° के लिठकà¥à¤¯à¤¾ किया जा सकता है?
परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ पेय पदारà¥à¤¥ दें
बà¥à¤–ार, डायरिया और उलà¥à¤Ÿà¥€ की वजह से शिशॠके शरीर में पानी की कमी हो सकती है। यदि आप शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाती हैं, तो उसे अपनी मरà¥à¤œà¥€ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने दें। फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध पीने वाले या ठोस आहार खाने वाले शिशà¥à¤“ं के लिठपानी ही सबसे अचà¥à¤›à¤¾ पेय है।
ठोस आहार खाने वाले थोड़े बड़े शिशà¥à¤“ं को नारियल पानी, नींबू पानी, लसà¥à¤¸à¥€ और छाछ à¤à¥€ दी जा सकती है। बेहतर है कि शिशॠको दो साल का होने से पहले फलों का रस न दिया जाà¤à¥¤ शिशॠके लिठजूस इतना सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯à¤•र नहीं है, जितना ही ताजा फल खिलाना।
यदि जरà¥à¤°à¥€ हो तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° शिशॠको ओरल रिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ सालà¥à¤Ÿ (ओआरà¤à¤¸) देने की सलाह दे सकती हैं। इससे शिशॠको सà¤à¥€ जरà¥à¤°à¥€ पोषक ततà¥à¤µ मिल सकेंगे, जिनका हà¥à¤°à¤¾à¤¸ हो रहा था। आपका शिशॠयदि केवल सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ ही करता हो, तो à¤à¥€ आप उसे यह दे सकती हैं।
पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• à¤à¥‹à¤œà¤¨ दें
छह महीने से कम उमà¥à¤° के शिशà¥à¤“ के लिठसà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध या फॉरà¥à¤®à¥‚ला सà¤à¥€ जरà¥à¤°à¥€ पोषण पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करते हैं।
यदि आपका बचà¥à¤šà¤¾ छह महीने से बड़ा है और ठोस आहार खाता है तो उसे नरम, पचने में आसान à¤à¥‹à¤œà¤¨ दें। सूप, दाल, खिचड़ी, दलिया आदि अचà¥à¤›à¥‡ विकलà¥à¤ª हैं।
फल और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‹à¤œà¤¨ समूह है और शरीर के लिठजरà¥à¤°à¥€ खनिज और विटामिन पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करते हैं। इसलिठशिशॠको जूस की बजाय पà¥à¤¯à¥‚री या फिंगर फूड के तौर पर इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में दें।
शिशॠको आराम करने दें
बचà¥à¤šà¥‡ को शांत कमरे में आराम करने दें। यह उसे बीमारी से लड़ने और ठीक होने मे मदद करेगा। यदि संà¤à¤µ हो तो शिशॠको घर में à¤à¤• अलग कमरे में आराम करने दें। इससे वह परिवार के अनà¥à¤¯ सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ या बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ करने से à¤à¥€ बचेगा।
बà¥à¤–ार को कम करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें
अगर आपके बचà¥à¤šà¥‡ को तेज बà¥à¤–ार है, तो आप हलà¥à¤•े गरà¥à¤® पानी से उसका शरीर पौंछ सकती हैं। यह उसे तरोताजा बनाà¤à¤—ा और तापमान कम करने में à¤à¥€ मदद करेगा। बà¥à¤–ार कम करने के कà¥à¤› गैर चिकितà¥à¤¸à¤•ीय उपायों के बारे में यहां पढ़ें।
अपने बचà¥à¤šà¥‡ को वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨ होने से मैं कैसे बचा सकती हूं?
वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨ मौसमी बदलाव के दिनों में सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ आम हैं, इसलिठसाल के उन दिनों में अधिक सावधानी बरतें। आप बचà¥à¤šà¥‡ का कीटाणà¥à¤“ं के संपरà¥à¤• में आना और उसकी सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित उपायों के जरिये कर सकती हैं:
सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करें कि शिशॠको सà¤à¥€ टीके लगे हों
हाथों की साफ-सफाई पर विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें। कीटाणà¥à¤“ं को फैलने से रोकने का यह सबसे बेहतरीन उपाय है।
शिशॠके दूध की बोतलों और अनà¥à¤¯ उपकरणों को अचà¥à¤›à¥€ तरह सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤œ करें।
à¤à¥‹à¤œà¤¨ और पानी की सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें
बीमार लोगों से दूर रहें, और चारों तरफ से बंद à¤à¥€à¤¡à¤¼ à¤à¤°à¥€ जगहों पर न जाà¤à¤‚, विशेषतौर पर जब कोई संकà¥à¤°à¤®à¤£ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ फैला हो।
खिलौने, बरà¥à¤¤à¤¨, चादर या तौलिये बीमार वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के साथ साà¤à¤¾ न करें।
खांसते या छींकते समय टिशà¥à¤¯à¥‚ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें। इसके बाद तà¥à¤°à¤‚त टिशà¥à¤¯à¥‚ को ढकà¥à¤•न वाले डसà¥à¤Ÿà¤¬à¤¿à¤¨ में डालें और हाथ धो लें। इससे कीटाणà¥à¤“ं को फैलने से रोका जा सकेगा।
बार-बार छà¥à¤ जाने वाली और इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किठजाने वाली सतहों को कीटाणà¥à¤¨à¤¾à¤¶à¤• से साफ करें।
परोकà¥à¤· धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ और अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¦à¥‚षकों से बचें।
अपने घर को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤, साफ रखें और हवा की आवाजाही बनी रहने दें।
वायरल संकà¥à¤°à¤®à¤£ और बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² संकà¥à¤°à¤®à¤£ में कà¥à¤¯à¤¾ अंतर है?
वायरल और बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² दोनों ही इनफेकà¥à¤¶à¤¨ आपको बीमार कर सकते हैं। इनके अकà¥à¤¸à¤° à¤à¤• जैसे लकà¥à¤·à¤£ होते हैं जैसे कि बà¥à¤–ार, बदन दरà¥à¤¦ और बेचैनी। मगर इनमें कà¥à¤› मà¥à¤–à¥à¤¯ अंतर इस पà¥à¤°à¤•ार हैं:
वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨
वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨ वायरस की वजह से होता है।
वायरस को अपनी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤²à¤¿à¤ªà¥€ तैयार करने और बढ़ने के लिठहोसà¥à¤Ÿ कोशिका की जरà¥à¤°à¤¤ होती है।
à¤à¤‚टिबायोटिकà¥à¤¸ की जरà¥à¤°à¤¤ नहीं होती, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इनका वायरस पर कोई पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ नहीं होता।
वायरल à¤à¤• बहà¥à¤¤ ही आम इनफेकà¥à¤¶à¤¨ है और à¤à¤• हफà¥à¤¤à¥‡ में अपने आप ठीक हो जाता है।
बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इनफेकà¥à¤¶à¤¨
बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इनफेकà¥à¤¶à¤¨ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की वजह से होते हैं।
बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ अपने आप में बढ़ते जाते हैं और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ होसà¥à¤Ÿ कोशिका की जरà¥à¤°à¤¤ नहीं होती।
बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ अचà¥à¤›à¥‡ और बà¥à¤°à¥‡ दोनों तरह के होते हैं। उदाहरण के तौर पर अचà¥à¤›à¥‡ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ हैं आंतों के बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ जो कि पाचन में मदद करते हैं। केवल कà¥à¤›à¥‡à¤• नà¥à¤•सानदेह बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ गंà¤à¥€à¤° बीमारी पैदा करते हैं।
जीवाणà¥à¤œà¤¨à¤¿à¤¤ बीमारियों के उपचार के लिठआमतौर पर à¤à¤‚टिबायोटिक दवाओं की जरà¥à¤°à¤¤ पड़ती है। ये दवाà¤à¤‚ बीमारी पैदा करने वाली विशिषà¥à¤Ÿ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤® को मारती है।
इसका उपचार कà¥à¤› दिनों से लेकर कà¥à¤› हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ तक चल सकता है, यह इनफेकà¥à¤¶à¤¨ के पà¥à¤°à¤•ार पर और आपके शरीर की इसके पà¥à¤°à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ पर निरà¥à¤à¤° करेगा।
कई बार वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨ के बाद सैकंडरी इनफेकà¥à¤¶à¤¨ à¤à¥€ हो सकता है। à¤à¤¸à¤¾ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इनफेकà¥à¤¶à¤¨ की वजह से हो सकता है। यदि à¤à¤¸à¤¾ हो तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¤‚टिबायोटिक दवाà¤à¤‚ लेने की सलाह देंगे।
कà¥à¤› मामलों में बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² या वायरल इनफेकà¥à¤¶à¤¨ का पता लगाना आसान नहीं होता। कà¥à¤› बीमारियां जैसे कि डायरिया, मेनिंजाइटिस या निमोनिया वायरस या बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ किसी की à¤à¥€ वजह से हो सकता है।
इनफेकà¥à¤¶à¤¨ को देखते हà¥à¤ डॉकà¥à¤Ÿà¤° पेशाब, खून या मल की जांच या कलà¥à¤šà¤° टेसà¥à¤Ÿ करवाने के लिठकह सकते हैं, ताकि इनफेकà¥à¤¶à¤¨ की पहचान हो सके। कà¥à¤› मामलों में नाक या गले में से सà¥à¤µà¥‰à¤¬ नमूना लिया जाता है।
विषाणॠऔर जीवाणॠजनित संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ की वजह से उपचार न किठजाने पर गंà¤à¥€à¤° बीमारियां हो सकती हैं, इसलिठआपको जलà¥à¤¦ से जलà¥à¤¦ डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करना चाहिà¤à¥¤
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